भारत और ईरान का रिश्ता होगा मजबूत, चाबहार समझौते पर होंगे हस्ताक्षर, शिपिंग मंत्री रवाना

भारत और ईरान ने चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए के लिए लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रेक्ट को फाइनल कर लिया है. इस Chabahar port के लिए दोनों देशों के बीच दो दशकों से अधिक से धीमी गति से बातचीत चल रही है. इस बंदरगाह पर चल रही बातचीत समय-समय पर geopolitical तनावों से बाधित हो रही थी. अब भारत अगले 10 सालों के लिए चाबहार बंदरगाह पर एग्रीमेंट करने के लिए, ईरान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार है. व्यस्त चुनावी मौसम के बीच, इस कदम को ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण भूराजनीतिक पहुंच के रूप में माना जा रहा है. शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को हस्ताक्षर के लिए सोमवार को ईरान जाना है.
पहली बार बंदरगाह का प्रबंधन भारत के हाथ में
यह पहली बार है जब भारत विदेश में किसी बंदरगाह का प्रबंधन अपने हाथ में लेगा. यह बंदरगाह, जिसे अफगानिस्तान, मध्य एशिया और बड़े यूरेशियन क्षेत्र के लिए भारत की प्रमुख कनेक्टिविटी लिंक के रूप में देखा जा रहा है. पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के साथ-साथ चीन की बेल्ट एंड रोड पहल को संतुलित करने में मदद करेगा. चाबहार को अंतर्राष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन (आईएनएसटीसी) से जोड़ने की योजना है, जो भारत को ईरान के माध्यम से रूस से जोड़ेगा. यह बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान और अंततः मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान को बायपास करने में सक्षम बनाएगा.
पश्चिम एशिया संकट के बीच कॉन्ट्रेक्ट होना बड़ी बात
अप्रैल में विदेश मंत्रालय ने बंगाल की खाड़ी में म्यांमार के सिटवे बंदरगाह पर परिचालन संभालने के लिए इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. विशेषज्ञों का कहना है कि सोनोवाल एक महत्वपूर्ण चुनाव अभियान के दौरान यात्रा कर रहे हैं, जो पिछले कुछ वर्षों से बन रहे समझौते के महत्व को दर्शाता है. यह समझौता भारत को उस बंदरगाह को चलाने में सक्षम बनाएगा, जिसके विस्तार के लिए उसने वित्त पोषण किया है. यह कॉन्ट्रेक्ट इस समय होना भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पश्चिम एशिया संकट के बीच हो रहा है, जिसने प्रमुख व्यापार मार्गों को प्रभावित किया है.
लंबे समय से चले आ रहे संबंध
पिछले साल अगस्त में दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में और बाद में नवंबर में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच बातचीत में चाबहार का मुद्दा प्रमुखता से आया था, जब उन्होंने गाजा संकट पर फोन पर बात की थी.
2016 में मोदी की ईरान यात्रा के दौरान चाहबहार पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे. 2018 में ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भारत का दौरा किया था, तब बंदरगाह पर भारत की भूमिका के विस्तार का मुद्दा प्रमुखता से उठा था. यह तब भी सामने आया था जब विदेश मंत्री एस जयशंकर जनवरी 2024 में तेहरान में थे. नया समझौता 10 साल के लिए वैध होगा और बढ़ाया जाएगा. यह बंदरगाह मध्य एशिया में रुचि रखने वाले भारतीय व्यापारियों और निवेशकों के लिए भी उपयोगी होगा
इससे पहले भी एक समझौता हुआ था जिसमें केवल चाबहार बंदरगाह के शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल पर परिचालन शामिल है. इसे हर साल रिन्यू किया जाता है.



