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इंडोनेशिया में कोल्ड लावा से 3 दिन में 41 मौतें:मरने वालों में 2 बच्चे भी; बाढ़-लैंडस्लाइड से सैकड़ों घर-मस्जिद तबाह,

इंडोनेशिया के सुमात्रा आईलैंड में 11 मई से हो रही भारी बारिश से अब बाढ़ आ गई है। इससे कई इलाकों में लैंडस्लाइड हुई। चट्टानों और पहाड़ों के पत्थर-मलबे के साथ ही ज्वालामुखी का ठंडा लावा भी रिहायशी इलाकों तक पहुंचकर तबाही मचा रहा है। अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है। आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 17 से ज्यादा लोग लापता हैं।

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, सुमात्रा आईलैंड के अगम और तनाह दातार जिले में सबसे ज्यादा तबाही हुई है। यहां के कई शहरों में सड़कें टूट गईं, 100 से ज्यादा घर, मस्जिदें तबाह हो गई हैं। सुमात्रा डिजास्टर मिटिगेशन एजेंसी अफसर इल्हम वहाब ने कहा- रविवार देर रात (12 मई) 37 लोगों की लाश मिली थी, यह आंकड़ा सोमवार सुबह (13 मई) तक 41 हो गया। इनमें 2 बच्चे हैं।

कोल्ड लावा का तापमान 50°C से कम ही होता है
ठंडा लावा को लहर के नाम से भी जाना जाता है। इसमें राख, रेत और कंकड़ पाए जाते हैं। ये भारी बारिश से ज्वालामुखी की ढलानों से नीचे आते हैं।

कई अकादमिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोल्ड लावा का तापमान 0°C से 100°C हो सकता है। आमतौर पर यह 50°C से कम ही होता है। US जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा कि बहते हुए ठंडे लावा से कई इलाकों में कीचड़ हो गया है। इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कतें आ रही हैं।

माउंट मरापी का लावा बह रहा
11 मई से वेस्ट सुमात्रा आईलैंड के अगम और तनाह दातार जिले में बारिश हो रही है। इससे बाढ़ आई। यहां माउंट मरापी भी स्थित है। इस पर्वत पर अक्सर ज्वालामुखी फटते रहते हैं। मेरापी पर्वत का ज्वालामुखी 1930 से इंडोनेशिया का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है। इससे 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

पूरे इंडोनेशिया में 121 सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं। इनमें से माउंट सेमेरू सबसे खतरनाक है।

इंडोनेशिया ‘रिंग ऑफ फायर’ के क्षेत्र में आता है
ज्वालामुखी धरती की सतह पर मौजूद प्राकृतिक दरारें होती हैं। इनसे होकर धरती के आंतरिक भाग से पिघला हुआ पदार्थ जैसे मैग्मा, लावा, राख आदि विस्फोट के साथ बाहर निकलते हैं।

ज्वालामुखी पृथ्वी पर मौजूद 7 टेक्टोनिक प्लेट्स और 28 सब टेक्टोनिक प्लेट्स के आपस में टकराने के कारण बनते हैं। दुनिया का सबसे एक्टिव ज्वालामुखी माउंट एटना इटली में है।

अलजजीरा के मुताबिक, इंडोनेशिया ‘रिंग ऑफ फायर’ के क्षेत्र में आता है। यहां पैसेफिक महासागर के करीब हॉर्स-शू के शेप की टेक्टॉनिक फॉल्ट लाइन्स हैं। रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है जहां कई कॉन्टिनेंटल के साथ ही ओशियनिक टेक्टोनिक प्लेट्स भी हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है, सुनामी उठती है और ज्वालामुखी फटते हैं। यह क्षेत्र 40 हजार किलोमीटर में फैला है। दुनिया में जितने सक्रिय ज्वालामुखी हैं, उनमें से 75% इसी क्षेत्र में हैं।

15 देश- जापान, रूस, फिलिपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, कनाडा, अमेरिका, मैक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पेरू, इक्वाडोर, चिली, बोलिविया रिंग ऑफ फायर की जद में हैं।

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