एथनाल के बाद अब मेथनाल से आयात बिल कम करने की तैयारी, कार्बन उत्सर्जन के साथ एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी आएगी कमी

पेट्रोलियम के आयात बिल के साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए सरकार एथनाल के बाद अब एक अन्य वैकल्पिक ईंधन मेथनाल का बड़े पैमाने पर उत्पादन का इको सिस्टसम तैयार करने में जुट गई है। इस काम में नीति आयोग सरकार की मदद कर रहा है। असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड और बीएचईएल (BHEL) के साथ कुछ अन्य कंपनियां मेथनाल का सीमित मात्रा में उत्पादन शुरू कर चुकी है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। पेट्रोलियम के आयात बिल के साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए सरकार एथनाल के बाद अब एक अन्य वैकल्पिक ईंधन मेथनाल का बड़े पैमाने पर उत्पादन का इको सिस्टसम तैयार करने में जुट गई है। इस काम में नीति आयोग सरकार की मदद कर रहा है और जल्द ही सरकार मेथनाल से जुड़े नियामक का फ्रेमवर्क तैयार कर लेगी। अगले कुछ सालों में इजरायल व अन्य देशों की तकनीकी मदद से भारत में कई मेथनाल प्लांट लगाए जाएंगे।

असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड और बीएचईएल (BHEL) के साथ कुछ अन्य कंपनियां मेथनाल का सीमित मात्रा में उत्पादन शुरू कर चुकी है। नीति आयोग का मानना है कि मेथनाल अर्थव्यवस्था के विकास से इसके उत्पादन, वितरण व संबंधित सेवाओं से 50 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का भी सृजन होगा। मेथनाल उत्पादन के दौरान निकलने वाली डाई-मिथाइल एथर (डीएमई) को 20 प्रतिशत तक एलपीजी में मिलाने से प्रति एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ता को 50-100 रुपए तक कम दाम पर मिल सकते हैं।

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